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Ravichandran Ashwin Opens RCB Doors – रविचंद्रन अश्विन की आरसीबी के लिए खेलने की अधूरी ख्वाहिश

अश्विन की आरसीबी के लिए खेलने की हसरत

भारतीय क्रिकेट के इतिहास में रविचंद्रन अश्विन का नाम एक ऐसे खिलाड़ी के रूप में दर्ज है, जिसने अपनी फिरकी के जादू से खेल के हर प्रारूप में लोहा मनवाया है। 2025 के मध्य में अपने आईपीएल करियर को अलविदा कहने वाले अश्विन ने न केवल चेन्नई सुपर किंग्स के साथ दो बार आईपीएल और दो बार चैंपियंस लीग टी20 खिताब जीते, बल्कि पंजाब किंग्स, दिल्ली कैपिटल्स और राजस्थान रॉयल्स जैसी टीमों के साथ भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।

हालांकि, इतने शानदार करियर के बावजूद अश्विन के मन में एक टीस बाकी रह गई। हाल ही में एक बातचीत के दौरान, 39 वर्षीय इस दिग्गज ने स्वीकार किया कि आईपीएल के दौरान उनकी रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की जर्सी पहनने की एक गहरी इच्छा थी।

आरसीबी के प्रति लगाव और चिन्नास्वामी स्टेडियम की यादें

विमल कुमार के यूट्यूब चैनल ‘अश की बात’ पर बातचीत करते हुए, जब अश्विन से पूछा गया कि क्या कोई ऐसी टीम है जिसके लिए वह खेलना चाहते थे, तो उन्होंने कहा, ‘मैंने सीएसके के लिए खेला और मैं वहां बहुत खुश था। लेकिन अगर कोई और टीम थी जिसके लिए मैं खेलना पसंद करता, तो वे राजस्थान रॉयल्स और आरसीबी थी।’

अश्विन ने आगे बताया कि एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम से उनका खास जुड़ाव है। उन्होंने कहा, ‘आरसीबी के घरेलू मैदान पर खेलने की मेरी अच्छी यादें हैं। भारतीय टेस्ट टीम के लिए खेलते हुए भी वहां के दर्शकों ने मुझे हमेशा प्रोत्साहित किया है। साथ ही, बेंगलुरु मेरे गृह नगर के काफी करीब है, जिससे वहां का माहौल मुझे हमेशा अपना सा लगा।’

आरसीबी की सफलता पर अश्विन की प्रतिक्रिया

आईपीएल 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु का प्रदर्शन वाकई काबिले तारीफ रहा है। 2025 में अपना पहला आईपीएल खिताब जीतने के बाद, टीम अब लगातार दूसरी बार फाइनल में पहुंच चुकी है। अश्विन ने आरसीबी के इस कायापलट की जमकर सराहना की।

अश्विन ने कहा, ‘मैं आरसीबी के लिए बहुत खुश हूं। वे इसके हकदार हैं। किस्मत सिर्फ किस्मत नहीं होती, किस्मत मेहनत से कमाई जाती है।’ यह टिप्पणी आरसीबी के प्रति उनके सम्मान को दर्शाती है, जिसने पिछले कुछ वर्षों में खुद को एक ‘अंडरअचीवर’ की छवि से बाहर निकालकर टूर्नामेंट की सबसे घातक टीम में बदल लिया है।

क्वालीफायर 1 में गुजरात टाइटंस पर दबदबा

आरसीबी का हालिया फॉर्म उनके दावे को और मजबूत करता है। हाल ही में धर्मशाला में खेले गए पहले क्वालीफायर मुकाबले में आरसीबी ने गुजरात टाइटंस को 92 रनों के बड़े अंतर से मात दी। इस मैच में कप्तान राजत पाटीदार ने शानदार नेतृत्व किया और मात्र 33 गेंदों में 93 रनों की नाबाद पारी खेली, जिसमें पांच चौके और नौ गगनचुंबी छक्के शामिल थे।

गेंदबाजी में भी आरसीबी का पलड़ा भारी रहा। जैकब डफी और भुवनेश्वर कुमार ने शानदार गेंदबाजी करते हुए गुजरात टाइटंस के बल्लेबाजी क्रम की कमर तोड़ दी। 255 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी गुजरात की टीम मात्र 162 रनों पर ही सिमट गई।

आरसीबी की यह निरंतरता और आक्रामक खेल शैली उन्हें इस साल फिर से खिताब का प्रबल दावेदार बनाती है। भले ही रविचंद्रन अश्विन कभी आरसीबी की जर्सी में मैदान पर न उतर पाए हों, लेकिन एक खेल प्रेमी के तौर पर उनकी शुभकामनाएं और प्रशंसा इस फ्रेंचाइजी के साथ बनी हुई है।

निष्कर्ष

रविचंद्रन अश्विन का यह खुलासा हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि अगर वह कभी आरसीबी के लिए खेलते, तो क्या समीकरण होते। क्रिकेट की दुनिया में ऐसी ‘अधूरी ख्वाहिशें’ अक्सर खिलाड़ियों की कहानियों को और अधिक दिलचस्प बना देती हैं। फिलहाल, आरसीबी का ध्यान अपने दूसरे लगातार खिताब को जीतने पर है, और प्रशंसक इस ऐतिहासिक सफर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।